सागर शर्मा शिवपुरी - शिवपुरी का टीएचआर प्लांट एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार पोषण आहार से ज्यादा चर्चाओं में है वहां की तानाशाही, उत्पीड़न और भ्रष्टाचार जब किसी सरकारी संस्था में घोटालों की बदबू उठने लगती है तो पहली कोशिश होती है—सच बोलने वालों की आवाज़ दबाने की और टीएचआर प्लांट में ठीक यही हो रहा है।
डिस्पैच सुपरवाइजर शिवांगी शर्मा का आरोप है कि प्लांट की सीईओ युक्ति शर्मा को संदेह था कि वह भ्रष्टाचार की पोल खोल रही हैं, इसलिए उनका मोबाइल जबरदस्ती छीन लिया गया। सवाल यह है कि अगर उनके मोबाइल में भ्रष्टाचार के सबूत नहीं थे, तो उसे छीनने की जरूरत क्यों पड़ी❓
क्या यह सीधा-सीधा प्रमाण नहीं है कि कुछ गड़बड़ जरूर है❓
सबसे गंभीर आरोप यह है कि एक महिला कर्मचारी का पीछा किया जा रहा था, उसके वीडियो बनाए जा रहे थे, और वॉशरूम तक की निजता भंग की जा रही थी। यह सरासर यौन उत्पीड़न के दायरे में आता है। मगर प्रशासन इस पर आंख मूंदे बैठा है। क्या महिला सुरक्षा का नारा सिर्फ कागजी लफ्फाजी है? या फिर अधिकारी दबंगों की ढाल बन चुके हैं?
टीएचआर प्लांट की महिला कर्मचारी दावा कर रही हैं कि सीईओ भ्रष्टाचार के आरोपों में पहले भी फंसी हैं। अौबेदुल्लागंज जनपद पंचायत से इन्हें हटाया गया था, फिर भी इन्हें दूसरी पोस्टिंग मिल गई! क्या शिवपुरी प्रशासन के कान बहरे हो चुके हैं, या फिर भ्रष्टाचार की इस गंदी राजनीति में वे भी हिस्सेदार बन चुके हैं?
सबसे हास्यास्पद बयान देहात थाना प्रभारी रत्नेश यादव का आया। उनका कहना है कि उन्होंने सिर्फ मोबाइल लौटवाने की कार्रवाई की, बाकी कोई शिकायत नहीं आई! क्या यह पुलिस का काम सिर्फ सामान दिलवाना भर रह गया है? भ्रष्टाचार, यौन उत्पीड़न, कर्मचारियों को धमकी—इन पर क्या पुलिस को खुद संज्ञान नहीं लेना चाहिए था❓
शिवपुरी के लोग जानना चाहते हैं कि क्या सरकारी संस्थाओं में अब दबंगई, तानाशाही और भ्रष्टाचार खुलकर चलेंगे? क्या ईमानदार कर्मचारी अपनी नौकरी बचाने के लिए दबंगों के जूते चाटें? और जब कोई महिला अधिकारी का विरोध करे, तो उसका पीछा किया जाएगा, वीडियो बनाए जाएंगे और उसे बदनाम करने की कोशिश होगी❓
अगर यह मामला ऐसे ही दबा दिया गया, तो कल कोई और महिला इस भ्रष्टाचार का शिकार होगी। अब वक्त आ गया है कि शिवपुरी प्रशासन अपनी नींद से जागे, दोषियों पर कठोर कार्रवाई करे और जनता के सामने साफ करे कि क्या वाकई इस शहर में कानून का राज है, या फिर भ्रष्टाचारियों की हुकूमत❓
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